किशोर ने अभी गत वर्ष ही तो कक्षा ११ में स्कूल में प्रवेश लिया है, वह बहुत ही होशियार छात्र है, स्कूल के सभी शिक्षक और उसकी कक्षा के सभी छात्र उसकी बहुत तारीफ करते है, किसी भी छात्र को कोई भी परेशानी हो वो उसकी तत्काल मदद करता है. लेकिन गत कुछ दिनों से वो बहुत परेशान सा दिख रहा है पढाई में भी उसका मन नहीं लग रहा है लेकिन इस विषय में वह किसी से कुछ नहीं बता रहा है, एक दिन उसके शिक्षक ने उसको बोल ही दिया की किशोर मेरे को तेरे से कुछ काम है स्कूल के बाद १० मिनिट के लिए रुकना और मेरे से मिलकर ही घर जाना. उसदिन किशोर स्कूल की छुट्टी के बाद अपने शिक्षक से मिलने के लिए रुकता है उसके साथ घर जाने वाले साथी भी उसके लिए रुकते है सभी कक्षा में बैठे होते है की उनके शिक्षक आ जाते है आते ही वह किशोर के साथियों को बहार भेज देते है और किशोर से अकेले में बातचीत शुरू करते है, किशोर तुम्हारे कक्षा १०वि में ९० प्रतिशत से ज्यादा अंक कैसे आये? किशोर – सर मेरे पिताजी ने कहा था की किशोर बहुत होशियार है इसको तो मैं सोफ्टवेअर इंजिनीयर बनाऊंगा मुझे भी कंप्यूटर पर काम करना पसंद है तो मै भी बहुत खुश होकर पढाई करने लगा की मुझे सोफ्टवेअर इंजीनियर बनना है इसलिये मेरे कक्षा १० में अच्छे अंक आये थे और ११वि में भी सर . शिक्षक ने कहा अब क्या हो गया, तब किशोर ने कहा कि सर अब हर कोई कहता है कि कंप्यूटर लाइन में कोई दम नहीं बचा है कितने ही सोफ्टवेअर इंजिनीयर को नोकरी ही नहीं मिल रही है वो बेकार ही बैठे है. शिक्षक ने कहा ठीक है तो तुम अब क्या करोगे? किशोर ने कहा अब तो मै IAS बनूँगा सर. शिक्षक ने पूछा कि तुम्हारे पिताजी अब क्या कहते है, तो किशोर ने कहा वो तो वों ही सोफ्टवेअर इंजिनीयर की रट लगाये हुए है जब देखो वो सोफ्टवेअर इंजिनीयर का ही बोलते है, इसलिए आजकल मेरा मन पढाई में नहीं लग रहा. तब शिक्षक ने किशोर से पूछा क्या इंजीनियर IAS नहीं बन सकते है क्या? तो किशोर को एक दम झटका लगता है और कहता है क्यों नहीं बन सकते? अब मै पहले सोफ्टवेअर इंजीनियर बनूँगा उसके बाद आगे IAS बनूँगा. आज किशोर का चेहरा फिरसे पहले के समान खील उठा था. उसके मार्ग में आने वाले सारे गतिरोध अब दूर हो गए थे.