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लॉकडाउन २४ - गार्ड

ज्ञानी रेडीमेट कपड़ो का बहुत बड़ा व्यापारी है, उसका कपडा मार्केट बहुत बड़ा शोरुम है, लॉकडाउन के चलते पूरा बाजार बंद पड़ा है। शोरूम में चोरी न हो जाए, इस डर से ज्ञानी ने वहां गार्ड तैनात किए गए हैं। लॉक डाउन के कारण इन गार्ड की ड्यूटी भी ऐसी है कि इन्हें एक साथ कई दिनों तक वहीं रहना पड़ रहा है। ज्ञानी सेवा भावी भी बहुत है, उसने प्रशासन से अनुमति ले कर इस मोके पर करीब २५ गरीब परिवारों के १०० लोगो को रोज़ निशुल्क भोजन भी करता हैं, ताकि इस महामारी के समय में गरीबो को खाने की तकलीफ ना हो, अब उसका सुबह से यही काम रहता, लोगो के खाने की व्यवस्था करना, खाना बनाने के लिए भी उसने उन्ही परिवार में से ५,६ व्यक्तियों की मदद ले ली, वे भी ख़ुशी ख़ुशी खाना बनाने का काम करने लगे इसके बदले में उनको और उनके परिवार को भोजन मिल जाता था, एक दिन ज्ञानी को सामान की जरुरत पड़ी तो उसने प्रशासन से सामान की मदद मांगी तो प्रशासन ने उनको एक थोक किराना व्यापारी का पता दिया, जो संयोग से ज्ञानी का परिचित ही निकला, ज्ञानी ने उनको फ़ोन लगाया, और अपनी समाज सेवा के बारे में बताया तो व्यापारी भी बहुत खुश हुआ और नेक काम करने के लिए ज्ञानी को बधाई भी दी, ज्ञानी में बोला सामान की आवश्यकता है तो व्यापारी ने बोला आप तो लिस्ट भेज दो मैं सामान निकाल कर पैक कर दूंगा फिर आपको फ़ोन लगा दूंगा तो लेने किसी को भेज देना, ज्ञानी ने सामान की लिस्ट दे दी, व्यापारी का फ़ोन आया तो ज्ञानी स्वयं सामान लेने को गया, सामान लेते समय उसने सोचा की चलो एक बार दुकान का भी चक्कर लगा लेते है, गार्ड है या भाग गए, मालूम कर लेता हूँ, जब वह दुकान पर पंहुचा तो देखा ४,५ गार्ड वहा पर तैनात थे, ज्ञानी ने उनसे बातचीत करी और उनसे खाने पीने की व्यवस्था के बारे में पूछा तो एक गार्ड ने बताया हम तो यहाँ से अपने घर जा ही नहीं सकते, और यदि एक बार चले गए तो फिर वापस नहीं आ सकते, वो तो कुछ समाज सेवी लोग आते है वो हमको भोजन दे कर चले जाते है, ज्ञानी को अपनी गलती का अनुभव हुआ की जो उसकी दुकान की रखवाली कर रहे है, उनका इतना बुरा हाल है वो दुसरो के भरोसे है, और मैं दुसरो को खाना बाँट रहा हूँ, वो वहा से बिना कुछ कहे चले गया, जाते ही घर से एक हॉट प्लेट और कुछ बर्तन लेकर वापस दुकान पर आता है, और गार्ड को देते हुए बोलता है ये सामान और बर्तन लो, और कुछ पैसे भी रखो सुबह दूध मिले तब दूध ले लेना और चाय बना लेना, अब तुम खाने की चिंता मत करना मैं तुम्हारे लिए खुद रोज़ खाना लेकर आऊँगा, और तुम्हारे परिवार को किसी प्रकार कोई भी तकलीफ हो तो जब तुम्हारे लिए भोजन लेकर आऊँगा उस समय बता दिया करना. अब सभी गार्ड अपने काम पर निश्चिंत हो कर तैनात हो गए.