सुरेश और मुकेश भाई है सुरेश अभी कक्षा 9वी में तथा मुकेश अभी ७वीं में पड़ता है सुरेश बहुत बदमाशी करता रहता है वो कभी भी कक्षा में नहीं बैठता हमेशा बहार घूमता रहता, शिक्षक ने कई बार उसकी शिकायत उसके माता पिता से करी लेकिन सुरेश को कोई फर्क नहीं पड़ता था और उसकी शैतानिया बडती ही जा रही थी शिक्षक ने उसका नाम भी स्कूल में अनुपस्थित होने से काट दिया था लेकिन वो रोज़ स्कूल का नाम लेकर घर से निकल जाता था और स्कूल में ना बैठ कर रोज़ बहार घुमा करता था और तो और कई बार स्कूल के दुसरे बच्चो को लेकर गाँव के बहार खेत पर तो कभी तालाब पर भी मस्ती करने को भाग जाते थे सुरेश का पढाई में बिलकुल भी मन नहीं लगता था. वही मुकेश पढने में ठीक ठीक था लेकिन वो स्कूल रोज़ जाता था. उसकी कोई शिकायत घर पर नहीं जाती थी. एक दिन सुरेश स्कूल के बच्चो के साथ गाँव में पास वाले तालाब पर जा रहा था की रास्ते में उसने देखा कुछ बच्चे क्रिकेट खेल रहे है तो उसने सोचा क्यों ना इन बच्चो के साथ मैच खेले, उसने अपने सब साथियों को ये बात बताई सब राजी हो गए, जब मैदान में जाते है तो सुरेश देखता है उसका छोटा भाई मुकेश भी उन बच्चो के साथ क्रिकेट खेल रहा था, वो भी स्कूल टाइम में. सुरेश को बहुत गुस्सा आया उसने मुकेश को बहुत मारा और उसको स्कूल के टाइम पर स्कूल ना जाकर बाहर खेलने पर बहुत डाटा. इस पर मुकेश ने सुरेश को बोला भैया आप भी तो कहा स्कूल जाते हो आप भी तो रोज़ बाहर घूमते रहते हो और तो और आपका तो स्कूल से नाम भी कट गया है लेकिन आप रोज़ घर से स्कूल का बोल कर इधर उधर घूमते रहते हो, लड़ाई झगडा करते हो उसका क्या? जब आपका कुछ नहीं होता तो मेरा भी क्या होगा, इसलिए मै भी अब स्कूल नहीं जाऊँगा, दोस्तों के साथ घुमुंगा फिरूंगा और क्रिकेट खेलूँगा, पड़ लिख कर क्या होगा. उसी समय सुरेश को समझ आ गया की वो क्या कर रहा है, वो सीधे भाग कर स्कूल गया और जाकर अपने शिक्षक को पूरी बात बताई और कहा अब मै कभी भी स्कूल से भागूँगा नहीं और पढाई में ध्यान दूंगा आप कृपा कर के मेरा नाम फिर से लिख लीजिये. शिक्षक ने बोला ऐसा तो तू कई बार बोल चूका है अब मै तेरा नाम नहीं लिखूंगा, सुरेश उस दिन बहुत रोया और बोला सर आखरी बार मेरे को मौका दो अब मै आपको शिकायत नहीं आने दूंगा और मेरे जो साथी बाहर घूमते है उनको भी मै रोज़ स्कूल लेकर आऊँगा, शिक्षक ने बोला ठीक है मै तुमको पहले एक सप्ताह का समय देता हूँ तुम अपना अधुरा काम पहले पूरा करो और रोज़ स्कूल आओ फिर मै तुम्हारा नाम फिर से लिखूंगा. उसदिन सुरेश ने अपने सभी साथियों को समझाया और अपने सभी साथियों के साथ रोज़ स्कूल आता अपना और अपने साथियों का अधुरा काम पूरा करा कर स्कूल में पूरी लगन से पढाई में लग गया, और जो बच्चे स्कूल के समय बाहर घूमते दिखाई देते उनको भी समझा कर स्कूल में ले कर आता है.