मुकेश कम्पनी में ऊचें पद पर अधिकारी है, साथ ही वह एक अच्छा भजन गायक भी है, मुकेश को बचपन में ही तम्बाकू खाने की लत स्कूल के दोस्तों ने लगा दी थी, अब मुकेश बिना तम्बाकू के रह नहीं पता, तम्बाकू की लत के कारण कई बार उसको वरिष्ठ अधिकारियो के सम्मुख लज्जित भी होना पड़ता है. यदि वो तम्बाकू नहीं खाता तो उसके हाथ, पैर, सर में दर्द बना रहता, उसका मन किसी काम में नहीं लगता बस तम्बाकू को ही खोजता रहता, उसको तम्बाकू छोड़ने के लिए कई बार परिवार वालो ने समझाया लेकिन बोलता है की बस अब छोड़ दूंगा लेकिन तम्बाकू खाना छोड़ता नहीं, एक दो दिन नहीं खाता फिर खाने लग जाता, वो चाहता तो है लेकिन छोड़ नहीं पा रहा, उसको मालूम है कि तम्बाकू खाने से क्या क्या नुकसान है, अभी कुछ दिन पहले ही उसके दोस्त की मौत मुहं के कैंसर से हो गयी थी, तब से वो तम्बाकू छोड़ना चाहता है लेकिन छोड़ नहीं पा रहा है, जब भी वो तम्बाकू छोड़ना चाहता तो एक दो दिन तो ठीक रहता है लेकिन उसके बाद उसको बैचेनी होने लगती, घबराहट होने लगती, तम्बाकू की तलब लगती, बार बार पसीना आने लगता जिससे परिवार के सब लोग भी डर जाते और वह फिर से तम्बाकू खाने लगता. लॉक डाउन के चलते दुकानों के बंद होने से आवश्यक वस्तु का मिलना ही बंद हो गया तो फिर तम्बाकू का तो सवाल ही नहीं उठता, मुकेश के पिताजी ने सही मौका देख मुकेश से पूछा की ‘क्या तू ईमानदारी से तम्बाकू छोड़ना चाहता है क्या? यह सुनहरी मौका फिर नहीं मिलेगा’, मुकेश ने हां बोला कि मैं तम्बाकू खाना छोड़ना चाहता हूँ, इसपर मुकेश के पिताजी ने बोला कुछ तकलीफ होगी लेकिन मैं इस काम में तेरे साथ हूँ तुझको भी मेरा साथ देना होगा, २१ दिनों तक यदि तू मेरा साथ देगा तो तेरी यह बुरी आदत हमेशा हमेशा के लिए छुट जाएगी, मुकेश भी तैयार हो गया, अगले दिन से सुबह से पिताजी ने सबसे पहले मुकेश को अपने साथ प्राणायाम करवाया, फिर बोला जब भी तम्बाकू की इच्छा करे मेरे को बोलना, अब मुकेश को जब भी बैचेनी होती वो पिताजी को बोलता, पिताजी ने उसको पर्याप्त भोजन करने का बोलते और को जब भी बैचेनी सी लगे तो सोने की कोशिश करो, एक दिन जब मुकेश को ज्यादा बैचेनी होने लगी तो पिताजी उसके साथ पुरानी बातोँ को याद कर उन पर बात करने लगे जिसे मुकेश याद कर अपनी बाते भी बता रहा था कब २,३ घंटे निकल गए मालूम ही नहीं पड़ा और मुकेश अपने आप को बेहतर महसूस करने लगा, अब जब भी मुकेश को ज्यादा घबराहट हो रही होती तो पूरा परिवार उसके साथ भजन गाते, शुरू के २,३ दिन तो मुकेश के बहुत मुश्किल से निकले लेकिन उसके पिताजी और उसके परिवार ने उसका पूरा पूरा साथ दिया, अब धीरे धीरे मुकेश अपनी सामान्य अवस्था में आ रहा है, वह आवश्याकता अनुसार भोजन कर रहा है, पूरी पूरी नींद ले रहा है, जब उसको बैचेनी होती है तो पिताजी के साथ बैठ कर पुरानी बातें करने लगते है और शाम के समय भजन करने में भी पूरा परिवार मुकेश के साथ होता है, मुकेश को लग रहा है इस बार लॉक डाउन में उसकी तम्बाकू की लत का वाकई में लॉक डाउन हो ही जायेगा.