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लॉकडाउन २२ - सच्ची समाज सेवा

रमेश दाल मील का कर्मचारी है, वह अपनी पत्नी और बच्चे के साथ दाल के सामने वाली कॉलोनी में ही रहता है, रमेश बहुत ही ईमानदार, मेहनती और आत्मसन्मान के साथ जीने वाला व्यक्ति है, वह हर किसी के दुःख दर्द में हमेशा खड़ा रहता है, उसकी कॉलोनी में अधिकांश दाल मिलो में काम करने वाले कर्मचारी ही रहते है, लॉक डाउन के चलते सभी दाल मील भी बंद सी हो गई हैं, जिससे सभी लोगो को हर तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, चुकी रमेश का पुरे क्षेत्र में अच्छा प्रभाव होने से किसी को कुछ भी परेशानी होती तो वह रमेश से ही कहता, कई घरो में राशन ख़त्म हो गया इसके चलते रमेश ने कई सामाजिक संस्थाओ से संपर्क कर लोगो को राशन भी उपलब्ध करवाया, संस्था के सदस्य कॉलोनी में आते रमेश के यहाँ सामान रखते और फिर लोगो को वितरित कर रमेश के यहाँ चाय पानी कर चले जाते लेकिन रमेश से उसकी आवश्यकता के बारे में कोई नहीं पूछता, अब रमेश के घर पर भी राशन खत्म होने को आया था उसकी पत्नी ने कहा कि ये संस्था वाले आते है इनसे ले लो, लेकिन रमेश ने कहा जब तक कोई मेरे से पूछेगा नहीं तब तक मैं उनसे कुछ मांगने वाला नहीं, नहीं तो वो समझेंगे की मेरे को जरुरत थी इसलिए लोगो का नाम लेकर उनको यहाँ बुलाया, और यदि अब कोई नहीं बोलेगा तो तुम भी लाइन में लग जाना और जो मिले वो ले लेना लेकिन मैं किसी से अलग से बोलूँगा नहीं, पत्नी करती भी क्या? इतने में रमेश के एक शिक्षक मित्र का फ़ोन आया उसने रमेश के हाल चाल पूछे और क्या चल रहा है, रमेश ने बताया की वह कॉलोनी वालो की मदद के लिए भिन्न भिन्न सामाजिक संस्थाओ से बात कर मदद करवा रहा है, रमेश का मित्र रमेश को अच्छी तरह जनता था, तो उसने पूछ ही लिया वो तो सब ठीक है लेकिन अपने घर का क्या हाल है घर पर राशन या किसी और वस्तु की आवश्यकता तो नहीं, इस पर रमेश ने बोल ही दिया कि यार क्या बताऊ सब संस्था वाले तो आते है और बाँट कर चाय पानी करके चले जाते है लेकिन कोई मेरे से पूछता तक नहीं, अब तो घर पर भी राशन के फांके पड़ने लगे है, तो मित्र बोलता है तू चिंता मत कर मैं तेरे लिए कुछ कोशिश करता हूँ, शिक्षक मित्र ने अपने दैनिक विनय उजाला को फ़ोन लगाकर मित्र का नाम, पता और फ़ोन नम्बर दिया, और अपने रमेश को बोल दिया की हमारे साथी तुमको घर आ कर राशन दे देंगे, तू किसी बात की चिंता मत करना. रमेश उनके इन्तजार ने घर पर चाय पानी की व्यवस्था करता है, तभी रमेश के पास फ़ोन आता है, और उससे पूछते है आप अभी कहा हो, रमेश बोलता है मैं घर पर ही हूँ, तो वे रमेश से फ़ोन पर ही बोलते है की आप एक काम करो, अपनी कॉलोनी के बाहर आ जाओ, रमेश तुरंत अपनी कॉलोनी के बाहर सड़क पर जाता है तो देखता है कि वहां कार में २ लोग उसका इन्तजार कर रहे थे, रमेश कार के पास जाता है, तो वह कार में से उतर कर उसको राशन का सामान दे देते है, और गाड़ी में बैठकर चले जाते है, रमेश उनको देखता रहता है और धन्यवाद् भी नहीं बोल पता, फिर वो अपने मित्र को फ़ोन लगाकर धन्यवाद् देता है, और बोलता है, कि मैं तो कुछ समझता इसके पहले ही वो चले गए, वाकई इसे ही असली समाज सेवा कहते है.