राम और श्याम दोनों पढ़ने में होशियार है अभी दोनों ने कक्षा 8वी अच्छे अंक से पास करने के बाद दोनों को शहर के बड़े स्कूल में प्रवेश मिल गया है राम पढने के साथ साथ फुटबॉल भी खेलता है. दोनों नए स्कूल में मन लगाकर पढाई कर रहे है, राम पढ़ने के साथ साथ स्कूल में फुटबॉल भी खेल रहा है वो रोज़ स्कूल के बाद फुटबॉल खेलने रुकता है, अब राम का ध्यान पढाई से धीरे धीरे हट रहा है और उसको परीक्षा में अच्छे नम्बर नहीं आने पर उसको पिताजी से भी डांट खाना पड़ी है, इस रविवार स्कूल में फुटबॉल मैच होना है इसलिए राम रविवार को स्कूल जाता है उसके स्कूल जाने के बाद श्याम अपने पिताजी के साथ राम के घर पर आते है, राम के पिताजी श्याम को बताते है की राम तो स्कूल में फुटबॉल खेलने गया है, जिस पर श्याम बोलता है हाँ मुझे मालूम है लेकिन मै आपसे राम के बारे में दूसरी बात करने को आया हूँ, इस पर राम के पिताजी बोलते है क्या बात है, श्याम बोलता है मै राम की कोई शिकायत करने नहीं आया मैं तो बस ये बताने आया हूँ कि राम के व्यवहार में बहुत परिवर्तन आ गया है, इसपर राम के पिताजी भी बोलते है हां मैंने भी महसूस किया है आजकल वो बहुत बदल गया है, श्याम बोलता है बदल नहीं गया वो बहुत परेशान है आजकल, उसने आप से भी बात करना चाही लेकिन आपने भी उसकी उसकी बात को सुना नहीं और उसको डांट भी लगा दी, इस पर राम के पिताजी पूछते है आखिर बात क्या है? श्याम बताता है स्कूल के कुछ बड़े छात्र राम के साथ दुर्व्यवहार कर रहे है वह रोज़ राम का टिफिन खा जाते है राम के जेब में से सब पैसे निकाल लेते है और जब राम उनको खाना या पैसा नहीं देता तो वो राम को मारते है और कहते है की यदि उसने किसी को कहा तो वो राम के हाथ पैर तोड़ देंगे, अब तो वो राम को सिगरेट भी पीने के लिए बोल रहे है राम बहुत मना कर रहा है लेकिन वो लड़के बहुत बदमाश है, गेम्स टीचर भी उनको कुछ नहीं बोलते, राम जब कुछ बोलता है तो सर भी उन लडको का साथ देते हैं, श्याम की बात सुनकर राम के पिताजी की आँखों में आसू आ गए उन्होंने श्याम को धन्यवाद बोला इसपर श्याम ने कहा में राम के सामने नहीं बोल सकता था इसलिए उसके जाने के बाद में आया हूँ आप उसको मेरे यहाँ आने का मत बताना और आप भी उसको ज्यादा मत बोलना, बोलकर श्याम वापस अपने घर चला गया, शाम को राम जब स्कूल से वापस आया तो उसके पिताजी ने बहुत प्यार से पूछा की मैच कैसा रहा कोन जीता तुम कैसा खेले? पहले तो राम ने झूट बोला की वो बहुत अच्छा खेला और बहुत कुछ बोला लेकिन धीरे धीरे उसके झूट पकड़ में आने लगे, फिर उसने अपने पिताजी को सब कुछ सच सच बता दिया की मेरे को तो टीम में खिलाते ही नहीं है बस वो उन लडको के लिए पानी लाना उनके कपडे लाना जूते मौजे उठाना ही मेरा काम है और वो अपना अधुरा काम भी मेरे से पूरा करवाते है मेरे पैसे भी छीन लेते है, जिससे वो गुटका खाते है, सिगरेट पीते है, अब मेरे भी पीछे पड़े है की यदि तुम सिगरेट नहीं पिओगे तो तुमको फुटबॉल की टीम में नहीं आने देंगे. अगले दिन राम के पिताजी स्कूल में प्राचार्य से मिलकर उनको सब कुछ बता देते है प्राचार्य राम की बात पर विश्वाश नहीं करते लेकिन कहते है की वो इस बात पर वो खुद ध्यान देंगे, १ २ दिन में वो सब बातों का पता लगा लेते है और मानते है की राम सही कह रहा है, प्राचार्य उन सभी लडको के पालकों को बुला कर उनकी शिकायत कर बोलते है की ये उनके लिए आखरी मौका है वो अपने बच्चों पर ध्यान देवे, गेम्स टीचर को उनके इस व्यवहार के कारण स्कूल से बहार कर दिया जाता है, और राम के पिताजी भी अब राम की बातोँ को ध्यान देने लगे है जिससे राम अब खुश रहने लगा है.