महामारी के चलते आज लॉक डाउन का चौथा दिन था मोनू ने अपने कमरे की सफाई कर बाहर आया ही था की मम्मी ने उसको बोल दिया की मोनू जा दूध ले आ, दूध वाला भी अब नहीं आएगा तो उसने मम्मी से पूछा कहा से लाना है, डेयरी से या किसी दूधवाले से, इस पर मम्मी ने कहा की जा डेयरी से ही दूध की २ लीटर की थैली ले आ, वो घर से निकला ही था की पास में रहने वाले दादाजी बोले मोनू चल में भी तेरे साथ चलता हु, आधा लीटर दूध में भी ले आऊ तू साथ रहेगा तो अच्छा रहेगा, इस पर मोनू बोला दादाजी आप क्यों चलते हो? में ही आपके लिए दूध ले आऊँगा, इस पर दादाजी बोले बहुत अच्छा होगा तू ही ले आये तो, उसने दादाजी से पैसे और बेग लेकर डेयरी पर दूध लेने चल दिया, डेयरी घर के पीछे वाली गली में ही थी, वहाँ पहुच कर देखता है की डेयरी पर १० १५ व्यक्ति झुण्ड बनाकर खड़े थे, तो मोनू ने डेयरी वाले काका से दूर खड़े होकर पूछा काकाजी क्या दूध ख़त्म होने वाला है? तो डेयरी वाले ने कहा नहीं बेटा अभी तो बहुत है, कितना चाहिए? तो मोनू बोला नहीं सभी भीड़ लगाकर खड़े थे तो समझा खत्म होने को है, वहा खड़े सभी व्यक्ति समझ गए और वो तत्काल दुरी बनाकर खड़े हो गए मोनू भी लाइन में लग कर अपनी बारी का इन्तजार करता है, बारी आने पर वह अपने लिए २ लीटर और पास वाले दादाजी के लिए आधा लीटर दूध लेता है ५४ रू लीटर के भाव से दूध के १३५ रू होते थे लेकिन डेयरी वाला जल्दबाजी में १२५ रु ही लेता है इस पर मोनू उनसे बोलता है काकाजी आपने मुझे ज्यादा पैसे वापस कर दिए आप ये १० रु वापस लो, इतना सुनते ही वहा खड़े लोग मोनू के तरफ देखने लगते है, मोनू १० रु देकर जाने लगता है इस पर डेयरी वाला मोनू से बोलता है, ये लो मेरा फ़ोन नम्बर अब जब भी तुमको दूध की आवश्यकता हो तो मेरे को फोन कर देना मैं दूध तुम्हारे घर भेज दूंगा और तुमसे कोई डिलेवरी चार्ज भी नहीं लूँगा. यह सुनकर मोनू अपने घर की और दूध लेकर चल देता है.