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शरारत

बात कुछ पुरानी है गाँव का स्कूल पुरे जिले का सबसे बड़ा स्कूल था, हर कक्षा के ३, ४ वर्ग थे, स्कूल में छात्र छात्र पढने के साथ साथ शरारत भी बहुत करते थे, और उनकी शिकायत आये दिन शिक्षक करते थे सभी कक्षाओ की यह प्रमुख समस्या थी लेकिन कक्षा ११ स में ऐसी कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती थी कक्षा की कक्षाध्यापिका हर शरारत को पहले से ही जान जाती थी और उसको रोक देती थी, पुरे स्कूल को आश्चर्य होता था की स्कूल के सबसे बदमाश बच्चो की कक्षा से कुछ भी शिकायत आती क्यों नहीं, एक दिन प्राचार्य ने मैडम से पूछ ही लिया की ऐसा क्या किया आपने अपनी कक्षा में कि बच्चे कोई शरारत ही नहीं करते, मैडम ने सर को बता ही दिया की मैंने कक्षा में सुरेश और रमेश को बोल रखा है की यदि कोई भी ऐसी बात हो मेरे को चुपचाप बता दिया करो और समय समय पर उनके प्रोत्साहन हेतु कक्षा में उनकी तारीफ भी कर देती हु जिससे वो मेरे को सबकी जानकारी देते रहते है और कक्षा में कोई शरारत होने से पहले ही उसकी जानकारी मुझे मिल जाती है तो में उसको रोक देती हूँ, प्राचार्य महोदय को भी यह बात पसंद नहीं आती है, और वह मैडम को सचेत करते है कि भविष्य में इससे छात्रों का कुछ नुकसान ना हो जाय, सुरेश कक्षा में अपनी मनमर्जी करने लगा जब चाहे वो किसी के बारे में मैडम को कुछ भी बोल देता था, एक दिन सुरेश को पूजा ने अपनी कॉपी नहीं दी तो सुरेश ने मैडम से पूजा की झूटी शिकायत कर दी जिससे मैडम ने पूजा को बहुत डांटा, मैडम के जाने के बाद पूजा बहुत जोर जोर से कक्षा में रोने लगी, अब तो यह कक्षा में आम बात हो गई थी जो सुरेश की बात नहीं मानता था, सुरेश मैडम से उसकी झूटी शिकायत कर देता था, जिससे कक्षा के सब बच्चे मिलकर सुरेश को सबक देने का सोचते है. सुरेश मेंडक पकड़ने में माहिर था जबकि अधिकांश बच्चो को मेंडक से डर लगता था, कुछ दिन पहले कक्षा में किसी ने मेंडक छोड़ दिया था जिससे कक्षा बहुत अस्त व्यस्त हो गई थी लेकिन मेंडक कहा से आया था उसका पता नहीं चल पाया था, बरसात के दिन थे एक दिन सुरेश स्कूल में कुछ देरी से आता है और कक्षा में मैडम से देरी से आने के लिए क्षमा मांगता है अपने स्थान पर बैठकर जैसे ही वह अपना बैग खोलता है एक मेंडक उसके बैग से निकल कर सीधे मैडम की टेबल पर कूद जाता है, यह देख मैडम बहुत नाराज हो गई और कहा कि तुम कल अपने पालक को स्कूल में ले कर आना नहीं तो उसका नाम स्कूल से ख़ारिज कर दूंगी, अब सुरेश ने मैडम को बहुत बोला की वह मेंडक को नहीं लाया क्या मालूम कैसे उसके बैग में आ गया, लेकिन मैडम ने उसकी एक नहीं मानी और कहा की मैंने तुम पर बहुत विश्वास किया लेकिन तुमने मेरे विश्वास को तोड़ दिया अब में तुम्हे माफ़ नहीं करुँगी, कह कर कक्षा से चली गई और प्राचार्य महोदय से सुरेश की शिकायत कर दी. मैडम के जाने के बाद सुरेश बहुत उदास हो गया अब उसको अपनी गलती का एहसास हो रहा था कि कोई भी छात्र इस समय पर उसके साथ नहीं थे, स्कूल की छुट्टी होने के बाद अमर प्राचार्य सर से मिलने उनके कक्ष में जाता है और प्राचार्यजी से निवेदन करता है की कृपया आप सुरेश का नाम स्कूल से ख़ारिज मत कीजिये इस पर प्राचार्य सर अमर से बोलते है की सुरेश ने बहुत बड़ी गलती करी है उसको माफ़ नहीं किया जा सकता, यदि उसके पालक लिखित में माफ़ी मांगेंगे और सुरेश भविष्य में इस प्रकार की कोई शरारत नहीं करेगा बोलेंगे तो ही उसका नाम ख़ारिज नहीं होगा वर्ना उसका नाम ख़ारिज होगा, इस पर अमर बोलता है की सर सुरेश के बैग में मेंडक मैंने ही रखा था वो कक्षा में हर किसी की झूटी शिकायत मैडम को करता था तो उसको सबक सिखाने के लिए मैंने ही मेंडक उसके बैग में रखा था, यह सुनते ही प्राचार्य सर मैडम को बुलाते है और उन्हें पूरा किस्सा सुनाते है पूरी बात सुन कर मैडम को भी अपनी गलती का एहसास होता है और वह अमर को वहा से जाने का बोल देती है, अगले दिन सुरेश अपने पिताजी को स्कूल लेकर आता है मैडम उन्हें पूरी घटना बताती है और साथ में अमर की बात भी बताती है इसपर सुरेश के पिताजी भी अमर की तारीफ करते है और कहते है की सुरेश को कक्षा में अपने साथियों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए और सबके साथ मिलजुल कर रहना चाहिए. उस दिन सुरेश ने सभी साथियों से माफ़ी मांगी और अब वह सबके साथ मिलजुल कर रहने लगा.