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गुस्से में आवाज तेज हो जाती है......

स्कूल में इंटरवल चल रहा था, कक्षा १२ में भी छात्र – छात्रा समूह में बैठ कर टिफिन खाने के साथ साथ आपस में मजाक मस्ती कर रहे थे. राजीव, पंकज, सुरेश का समूह भी कक्षा में टिफिन खा रहे थे, टिफिन खाने के बाद टेबल को साफ करने को लेकर पंकज और सुरेश में अनबन हो गई, तो वो जोर जोर से बात करने लगे कि पूरी कक्षा का ध्यान उनकी तरफ हो गया इतने में स्कूल की घंटी बज गई और सब अपनी अपनी जगह पर बैठ गए,और राजीव ने टेबल साफ कर दी, तभी कुछ बात हुई और वह फिर से तेजी से अपनी जगह से चिल्लाने लगे, इंटरवल के बाद कक्षा में केमिस्ट्री का पीरियड था और कक्षा में सर आ गए, आते ही उन्होंने पूछा माजरा क्या है, क्यों कक्षा में इतना शोर हो रहा है, तो राजीव ने बोला कुछ नहीं सर वो पंकज और अजय के बीच टेबल साफ करने पर झगडा हो गया था, तो सर ने पंकज और अजय से बात पूछी और दोनों को समझा कर बैठा दिया दोनों में फिर दोस्ती हो गई, और सर ने अध्यापन कार्य शुरू किया ही था कि रौशनी ने हाथ उठाया तो सर ने पूछा क्या बात है रौशनी? तो रौशनी ने कहा सर एक प्रश्न है, सर बोले क्या प्रश्न है? तो रौशनी ने पूछा की सर जब हम सामान्य बात करते है तो आवाज़ धीमे रहती है लेकिन जब झगडा होता है तो आवाज़ तेज क्यों हो जाती है? इस पर सर ने पूछा की आज कुछ ज्यादा बात हो गई है क्या? इस पर सभी ने बोला नहीं सर वो बात नहीं लेकिन रौशनी का प्रश्न बिलकुल सही है की गुस्से में व्यक्ति चिल्लाने क्यों लगता है? तब सर समझाया की जब कोई २ दोस्त बनते है तो दोस्ती में वो आपस में एक दुसरे के करीब रहते है एक दुसरे पर भरोसा करते है जिससे वो कई बाते तो इशारे इशारे में ही कर लेते है, उनको कुछ बोलने की भी जरुरत नहीं होती, लेकिन जब हमको गुस्सा आता है तो हम यह मान लेते है की अब मेरा कोई करीबी नहीं, कोई मेरी बात न तो कोई सुनता है और न ही मानता हैं इसलिए हम जोर जोर से बोलते है कि कोई तो मेरी बात सुनो और उसको लगता है कि कोई उसकी बात सुन ही नहीं रहा इसलिए वो एक ही बात को बार बार और जोर जोर से बोलता है और ये कोशिश करता है की सबका ध्यान उसकी और जाये और उसकी बात को सुने और माने कि वह सही बोल रहा है, गुस्सा आने पर ऐसा ही होता है इसलिए जब भी गुस्सा आये तो हमको तत्काल उस जगह से हट जाना चाहिए और हमें शांत मन से सोचना चाहिए की मैंने कहा गलती करी क्योकि हम अपनी गलती को तो सुधार सकते है सामने वाले की नहीं, इसलिए पहले अपने आप से शुरुआत करो. चलो अब पढाई कर ले, नहीं तो मेरी आवाज भी तेज हो जाएगी, तब सभी बच्चो ने एक साथ कहा नहीं नहीं सर शुरू करो, और अब सब का ध्यान पढाई में लग गया.