पूजा बहुत ही समझदार छात्रा है वो हर कार्य सोच समझकर करती है जिससे उसको हर कार्य में सफलता हासिल होती है लेकिन उसे लगता है की वह सफल हुई लेकिन उसकी सफलता पर कोई प्रसन्नता जाहिर नहीं करता बल्कि उसको सलाह जरुर देते है, जैसे छोटे भाई के जन्मदिन पर घर पर सब बोल रहे थे की खाने में क्या बनाना है लेकिन किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था, इस पर पूजा ने बोला की भाई को गाजर का हलवा पसंद है इसलिए मैं तो उसके लिए गाजर का हलवा बनाउंगी, सबको पूजा की बात पसंद आई उसने दिन भर मेहनत कर गाजर का हलवा बनाया शाम को जब खाने में सबने गाजर का हलवा खाया तो किसी ने क्या कमी निकाली किसी ने क्या, दुसरे दिन बचा हलवा वह स्कूल टिफिन में लेकर गई तो सभी सहेलियों ने गाजर के हलवे की बहुत तारीफ करी और जब पूजा ने बोला की मैंने बनाया है तो किसी को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ की पूजा ने ही बनाया है, पूजा निराश हो गई. अब स्कूल में अर्धवार्षिक परीक्षा है सब छात्र परीक्षा में अच्छे अंक आये इसलिए मेहनत कर रहे है पूजा से भी सभी मेहनत करने का बोल रहे है लेकिन पूजा ने बोल दिया की मेरे तो परीक्षा में कम से कम 75% अंक आयेंगे, परीक्षा के बाद परिणाम आये तो पता चला की पूजा को परीक्षा में 90 % अंक आये लेकिन सभी फिर उसको सलाह देने लगे की थोड़ी और मेहनत करती तो और अच्छे नम्बर आते, पूजा बहुत उदास हुई और कक्षा में चुपचाप सी रहने लगी, उसको उदास देख उसकी शिक्षिका ने पूजा से बात करी तो पूजा बोली की मैं कुछ नहीं कर सकती मेरे सभी काम में कुछ ना कुछ कमी रह जाती है, इस पर मैडम ने कहा नहीं तुम तो पूरी ईमानदारी से मेहनत कर काम को पूरा करती हो बस गलती यह हो जाती है की तुम पहले से सभी को काम की जानकारी दे देती हो जिससे सभी को तुमसे बहुत ज्यादा उम्मीदें हो जाती है इतनी की शायद वो भी ना कर सके, अब तुम काम करो बस पहले से उसके बारे में कुछ मत बोलो फिर देखो क्या परिणाम निकलते है, कुछ दिनों के बाद स्कूल में वार्षिकोत्सव का आयोजन होना था सभी उसकी तैयारी में लगे थे इस बार पूजा ने किसी भी गतिविधि में भाग नहीं लेने का सोच रखा था, घर पर भी सभी उसको स्कूल की गतिविधियों में हिस्सा लेने का बोल रहे थे लेकिन उसने कहा की मेरे सफल होने पर किसी को ख़ुशी नहीं होती इसलिए वो इस बार किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेगी, एक दिन मैडम ने पूजा को बुलाया और बोला की इसबार के कार्यक्रम का संचालन तुम करोगी, इस पर पूजा ने बोला मैंने तो आज तक किसी भी कार्यक्रम का संचालन नहीं किया है और ना ही आज तक कभी भाषण दिया है मैं कार्यक्रम का संचालन कैसे करुँगी इस पर मैडम ने कहा नहीं इस बार तो कार्यक्रम का संचालन तो तुमको ही करना है चाहे जैसे भी करो, पूजा को लगा की मैडम को उसपर बहुत विश्वास है अब तो कार्यक्रम का संचालन करना ही होगा और मैं अपनी पूरी कोशिश करुँगी की कार्यक्रम का संचालन अच्छा हो, लेकिन उसको अपने ऊपर विश्वास नही हो रहा था की वह कार्यक्रम का संचालन कर सकेगी इसलिए उसने इसबार किसी को नहीं बताया की वह कार्यक्रम का संचालन कर रही है वह हर समय संचालन के बारे में सोचती और हर परिस्थिति के बारे में सोचती की यदि ये हुआ तो क्या करना है और यदि वो हुआ तो क्या करना है, और पुराने कार्यक्रम के बारे में सोचती की उस कार्यक्रम का संचालन यदि में करती तो कैसे होता, वार्षिकोत्सव के दिन स्कूल के सभी छात्रों के पालक स्कूल में आये साथ ही शहर के गणमान्य नागरिक भी मुख्य अतिथि के रूप में आये, कार्यक्रम की शुरुआत जैसे ही पूजा ने करी तो उसके परिवार के साथ सभी को बहुत आश्चर्य हुआ और सभी ने सोचा की पूजा ये क्या कर रही है,यहाँ तक की पूजा की मम्मी ने तो बोल भी दिया की एक अच्छे कार्यक्रम का पूजा सत्यानाश कर देगी सब क्या बोलेंगे? लेकिन जैसे जैसे कार्यक्रम आगे बड़ा सभी को लगा की पूजा कार्यक्रम का संचालन बहुत ही सटीक तरीके से कर रही है, और तो और कार्यक्रम ने आये मुख्य अतिथि ने तो पूजा की तारीफ करी तो कहा की यदि पूजा चाहे तो उनके क्लब के कार्यक्रम का संचालन यदि पूजा करे तो उनको बहुत ख़ुशी होगी. कार्यक्रम समाप्ति पर पूजा के कार्यक्रम संचालन पर सभी आश्चर्यचकित थे और सभी पूजा की बहुत बहुत तारीफ कर रहे थे. आज पूजा भी बहुत खुश थी और मैडम को मन ही मन धन्यवाद दे रही थी की कि कार्य के पहले किसी को कुछ मत बताओ नहीं तो सभी की उम्मीदे बहुत ज्यादा हो जाती है.