गंगाराम का पुस्तेनी कम दूध का व्यवसाय है, उसके दादा भी यही कार्य करते थे, आज उसके पास करीब ५० गाय भैस है, उसका पूरा परिवार गाय भैस की सेवा करने में लगा रहता है, इसके अलावा २,४ और लोगो को भी इस काम के लिए भी रखा है, गंगाराम का एक ही पुत्र है रामू, गंगाराम ने बहुत कोशिश करी वो पड़ लिख ले लेकिन रामू को पड़ना लिखना पसंद नहीं था, वह दिन भर दोस्तों के साथ घूमता फिरता रहता लेकिन पढाई नहीं करता, जिससे वह ज्यादा पड़ भी नहीं पाया, गंगाराम के बहुत कहने पर वह रोज़ सुबह शाम उसको दूध निकालने में वह घर वालो की मदद करता, गंगाराम बहुत बोलता चल कुछ बंदी तेरे को दे देता हु, तू भी यही काम कर ले, लेकिन रामू गंगाराम की कोई बात नहीं सुनता, बस दिन भर दोस्तों के साथ आवारागर्दी करता रहता, गंगाराम अपना आधा दूध डेयरी वाले को देता क्योकि वह इतने बंदी बाट नहीं सकता था, उसने रामू को बहुत समझाया लेकिन रामू के कान पर जूँ तक नहीं रेंगती थी, महामारी के चलते लाक डाउन कर दिया गया, लेकिन रामू को तो आवारागर्दी करने का जो शौक था तो घर पर कहाँ बैठ सकता था, गंगाराम के लाख मना करने के बाद भी दोस्तों के साथ बाइक पर निकल ही गया, रास्ते में पुलिस ने रोका और जमकर सभी की सुताई कर दी, अब घर पर बैठे है हाथ पर हाथ रख कर, एक दिन गंगाराम ने रामू से बोला रामू अभी दूध की बहुत कमी चल रही है लोगो को दूध मिल नहीं रहा है, अपन अपना जो दूध डेयरी वाले को देते है वह भी लोगो में बाट देते है, रामू घर पर बैठे बैठे परेशान हो गया था, नहीं चाहते हुए भी पिताजी को हां भर दी, अब गंगा में उसको कुछ घर बता दिए और कुछ घर खुद ने रख लिए ताकि वो घर पर जल्द आ जाय, रामू को शुरू में दूध बाँटना पसंद नहीं आ रहा था लेकिन जैसे जैसे लोगो से मिलने लगा और उसको लगा दूध बाँटना भी सन्मान का काम है, अब उसको दूध बाँटने में मजा आने लगा, गंगाराम ने अपनी आधी बंदी अब रामू को बाँट दी कुछ नए लोग भी जुड़ गए जिससे अब उनको अपना दूध डेयरी पर देना नहीं पड़ रहा हैं, और जब से रामू दूध बाँटने जाने लगा है तब से उसकी आवारागर्दी भी बंद हो गई.