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प्रिय विषय

हरीश का प्रिय विषय गणित था, वह हर समय गणित के सवालों को ही हल करने में अपना समय व्यतीत करता था. दुसरे विषय पर इतना ज्यादा ध्यान नहीं देता था, जिससे कक्षा १० में उसे बोर्ड परीक्षा में गणित में तो १०० में से १०० और दुसरे विषयों में औसत अंक आये और उसने कक्षा १० वीं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर कक्षा ११ वि में गणित विषय का चयन किया, स्कूल में सभी शिक्षक छात्र उसकी गणित के लिए बहुत तारीफ करते थे और मानते थे की हरीश गणित का कोई भी सवाल हल कर सकता है, अब हरीश को भी इस पर अभिमान होने लगा था वो सोचने लगा था की गणित तो हो जायेगा दुसरे विषय पर ध्यान देना चाहिए तभी तो 12 वी के बाद कोई अच्छे से कॉलेज में प्रवेश मिलेगा, हरीश ने दुसरे विषयों की पढाई पर अब ज्यादा ध्यान देने लगा जब भी गणित की बात आती तो बस वो यही सोच लेता की गणित के सवाल मै कर ही लूँगा और उस समय पर वह अपना समय tv देखने या दोस्तों के साथ घुमने में व्यतीत करने लगा, यदि कोई उसको पड़ने का बोलता तो वो कहता कर तो रहा हूँ, कर लूँगा, आप मुझको मत बोलो और नाराज़ हो जाता फिर २ ३ दिन तो ना कुछ खाता ना पढाई करता और किसी भी बात का सीधा जवाब भी नहीं देता इसलिए अब उसको कोई कुछ कहता, कक्षा ११वी की वार्षिक परीक्षा में उसे दुसरे सभी विषयों में अच्छे अंक आये लेकिन उसको गणित में पूरक आई, उस दिन पहले तो उसको विश्वास ही नहीं हुआ वह अपनी गलती मान ही नहीं रहा था उसने अपनी कॉपी का पुर्नमूल्यांकन करवाया तब उसके शिक्षको ने उसकी कॉपी उसको दिखा दी और उसकी गलतियों को बताया तब उसकी आँखे खुल गई और जिस गणित को आसन समझ रहा था उसी में वह फ़ैल हो गया था, आज वह कह रहा है की मेरा अति आत्मविश्वास ही मेरी असफलता का कारण है, सभी विषयों पर पूरा ध्यान देना जरुरी है यदि कोई विषय अच्छा लगता है तो वह आपके परिणाम में चार चाँद लगाता है इसलिए उसपर भी उसमे ध्यान देना जरुरी है, पूरक परीक्षा उत्तीर्ण कर अब कक्षा १२ में वह सभी विषयों पर पूरा ध्यान लगाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है.