संजय एक ईमानदार और मिलनसार व्यक्ति है वो कॉलोनी में ही एक किराना दुकान चलाता है जो उसके पिताजी ने जब कॉलोनी कट रही थी तभी एक प्लाट लेकर उस पर घर बनाकर उसमें छोटी सी दुकान खोल ली थी, पिताजी के गुजर जाने के बाद अब संजय दुकान चला रहा है, वो भी मानता है कि जब से मॉल कल्चर आया है तब से दुकानदारी में पहले जितना मजा नहीं रहा लेकिन वो अपनी मेहनत और ईमानदारी से दुकान को चला रहा है और अपने व्यवहार और ग्राहकों की तकलीफों पर पूरा ध्यान देता है की उसके ग्राहकों को कभी कोई तकलीफ ना आये, अब पुराने समय जैसे ग्राहक तो रहे नहीं फिर भी, महामारी के इस समय में उसने देखा की लोगो को अत्यावश्यक सामान की कमी होने लगी है लोग खाने पीने के सामान के लिए परेशान हो रहे है लेकिन प्रशासन दुकान खोलने नहीं दे रहा और छुट के समय दुकान खोल भी लेता तो इतनी भीड़ हो जाती की वो आवश्यक दुरी नहीं रख पाते जिससे पुलिस दुकान बंद करा देती, ऐसे में उसने अपने नजदीक के लोगो की परेशानी हल करने का नया तरीका निकला, उसने अपने सभी पुराने ग्राहक जो अभी भी आस पास रह रहे है उन सभी को अपने मोबाइल से व्हाट्स अप पर एक सन्देश भेजा की आपको जो भी सामान की आवश्यकता है मेरे इस नंबर पर आप सामान की सूची भेज दीजिये मै पूरा सामान आपके घर पहुँचाने का प्रयास करूँगा, उसके ग्राहकों को उसका यह आईडिया बहुत पसंद आया उन्होंने उसको मोबाइल पर आवश्यक सामान की सूची भेजना शुरू कर दी, संजय जिसकी भी लिस्ट आती उनके सामान का एक बेग तैयार करता और बिल बना कर उनको बिल की राशी बता देता बिल का पैसा संजय ऑनलाइन ट्रान्सफर करावा रहा है क्योकि बैंक के बंद होने पर वो ऑनलाइन होलसेलर को पैसा भेज सके जिससे जो सामान ख़त्म हो जाये तो जल्द ही होलसेलर से खरीद सके, और जो सामान ख़त्म हो जाता या नहीं होता तो उसके बारे में बोल देता की यह सामान मंगाया जा रहा है आने पर आप तक भिजवाने की व्यवस्था कर दूंगा, लोगो ने संजय के बिल का मिलान मॉल से लाये सामान से किया कि कही संजय महामारी का फायदा तो नहीं उठा रहा, तब सभी ने पाया की संजय के द्वारा लगाये गए कई सामान के भाव मॉल में लगने वाले भाव से भी कम है और ज्यादा तो किसी के भी नहीं है साथ ही सामान की क्वालिटी भी अच्छी है, कई लोगो को तो लाइन में लगने के बाद भी सामान नहीं मिल रहा था जबकि उनको घर बैठे सामान वो भी शुद्ध और कम दाम पर मिल रहा था, संजय के बाजार में भी सम्बन्ध अच्छे होने से और ऑनलाइन पैसा भेजने से जो सामान उसके पास ख़त्म हो जाता था तत्काल बाजार से उसके पास आ जाता था, पुराने ग्राहक जो मॉल कल्चर के चलते उससे दूर हो गए थे अब वापस उसके पास आ रहे थे. यह देख संजय की ख़ुशी देखते ही बन रही थी.