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लॉक डाउन ९ - बीमारी का कोई धर्म नहीं होता

हमारे मिनी हिंदुस्तान अडोस पड़ोस सोसाइटी में आज सुबह से ही राम नवमी की धूम थी, महामारी के चलते पहले से ही सब कुछ काम का बटवारा किया जा चूका था जैसे मंदिर की साज सज्जा की जवाबदारी पीटर भाई को दी गई थी और यह भी कहा गया था की फूल के लिए कही जाने की जरुरत नहीं सोसाइटी के बगीचे के फूलो का ही उपयोग किया जायेगा, प्रसाद की जवाबदारी हमेशा की तरह बशीर भाई को दी गई थी, इस पर बशीर भाई ने बाहर से मिठाई ना मंगाकर घर पर ही प्रसाद के लिए खीर बनाई है, पूजा के लिए सब एक साथ इखट्टे ना हो इसलिए सुबह ८ बजे बच्चों के लिए, ८.३० पर महिलाओ के लिए तथा ९ बजे पुरुषो के लिए पार्किग में स्थान बनाया गया था जहा सब दूर दूर खड़े रहे इसलिए बलबीर भाई ने चुने से गोले बना दिए ताकि कोई पास पास ना रहे, पूजा में सबको मास्क लगाकर आना अनिवार्य था, ९ बजे आरती के बाद सभी फ्लैट पर प्रसाद भेजा जाने का सभी ने निर्णय लिया था, पीटर भाई ने सुबह से ही मंदिर को साफ कर बगीचे से फूल एकत्र कर भगवान लिए माला बना कर मंदिर को फूलो से सजा दिया, सभी बच्चे ८ बजे आकर उन्होंने पहले पूजा करी फिर सोसाइटी की सभी महिलाये आकार पूजा करती है उसके बाद सभी पुरुष भगवान राम की आरती में भाग लेते है आरती ख़त्म होने पर पाण्डेयजी और फरीद भाई सभी फ्लैट में प्रसाद भेजने की व्यवस्था करने लगते है, सभी पीटर भाई को मंदिर की सुन्दर साज सज्जा के लिए बधाई देते है, फिर पीटर भाई, जैन साहेब, गुप्ता जी बशीर भाई, बलबीर वहीं बैठ कर सामान्य बातचीत करने लगते है इतने में उनके साथ डॉक्टर सिन्हा भी आकर बैठ जाते है जो अस्पताल से आने में देरी हो जाने से आरती में नहीं आ सके थे क्योकि उन्हें अस्पताल से आकर स्नान भी करना था, डॉ.साहेब ने देरी से आने के लिए सबसे पहले माफ़ी मांगी फिर बोले अस्पताल में बहुत देरी हो गई, शहर के हालत बहुत ख़राब है बहुत मरीज़ आ रहे है, इतने मरीज़ की उम्मीद नहीं थी, तभी पीटर भाई ने कहा की कुछ लोग तो आप लोगो को इलाज करने में भी सहयोग नहीं दे रहे हैं, डॉ. सिन्हा ने कहा हाँ सही है किन्तु पांचो ऊँगली भी एक समान कहाँ होती है, इसपर बशीर भाई ने कहा बीमारी कहाँ जात पात पूछ कर आती है, हमें तो इस मौके पर सबको मिलकर बीमारी से लड़ना चाहिए और इस समय जो बीमारी से लड़ने में हमारी मदद कर रहे है उनको तो हमें सहयोग करना ही चाहिए तभी तो इस बीमारी को हम जल्द से जल्द हिदुंस्तान से बाहर कर सकेंगे. तभी डॉ. ने कहा अस्पताल में ब्लड की भी कमी हो गई है, इस पर सभी ने एक साथ बोला चलो आज त्यौहार के दिन हम सब एक साथ मिलकर रक्तदान कर आये, डॉ. सुनकर बहुत प्रसन्न हुए उन्होंने तत्काल अस्पताल इसकी खबर करी, अस्पताल से एक गाड़ी आई जिसमे सभी ने एक साथ जाकर रक्त दान किया.