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लॉक डाउन ५. करोना – कोई रोड़ पर न निकले

महामारी के चलते आज लॉक डाउन का पांचवा दिन था, शहर में बिगड़ते हालात पर प्रशासन ने सभी प्रकार की ढील देना बंद कर दी है, अमित और सुमित दोनों लंगोटिया दोस्त है दोनों पास पास रहते है लेकिन बड़े एबले(नादान) हैं, जब दोनों साथ होते है तो किसी की भी नहीं सुनते बस जो मन में आता करते है, दोनों को दूर रखना संभव ही नहीं है, लॉक डाउन के चलते दोनों को अपनी नादानी करने का अच्छा अवसर प्राप्त हो गया, वो कुछ गलत करना चाहते नहीं लेकिन बचपने और नादानी में गलती हो ही जाती, अब उनको खाली सडको पर गाड़ी चलाने की शैतानी सूझी अब दोनों जब देखो गाड़ी उठाते और निकल पड़ते, दोनों को लाख समझाया लेकिन उनको कुछ भी समझ में नहीं रहा, और बोलते की कुछ नहीं होता. २ दिन पहले उनको पुलिस ने रोक लिया था लेकिन झूट बोल कर की मम्मी की दवाई लेने आये है बच कर निकल आये जिससे उनकी हिम्मत और खुल गई, आज जब टीवी पर रामायण आ रही थी तब दोनों ने चुपचाप पापा की बाइक उठाई और चल दिए रास्ते में पुलिस ने रोक लिया, जब तक कुछ बोलते ३ ४ लट्ठ पड़ गए उसके बाद दोनों से पहले तो ५० ५० बैठक लगवाई फिर ५ ५ लट्ठ और मारे फिर कुछ पूछा लेकिन जब तक तो दोनों की हालत ही ख़राब हो गई माफ़ी मांग कर जैसे तैसे घर आये, घर पर आये तो जब घर वालो को मालूम हुआ तो सबको दोनों पर बहुत गुस्सा आया, दोनों ने अब गाड़ी को हाथ लगाने के लिए कान पकड़े और बोले कोरोना मतलब ‘’कोई रोड़ पर ना निकले’’ सुन कर सभी घर वालो को जोर से हँसी आ गई.