सागर कक्षा १२ वी का बड़ा ही होनहार और मिलनसार छात्र है आज उसका जन्मदिन है वह कक्षा में सभी साथियों को टॉफ़ी खिला कर जन्मदिन मना रहा है, कक्षा के सभी साथी उसको जन्मदिवस पर बधाईयाँ दे रहे है लेकिन विनोद ने ना तो टॉफ़ी ली ना ही सागर को जन्मदिन की बधाई दी, शिक्षक ने देखा लेकिन कुछ कह नहीं सके क्योकि उनको मालूम है की सागर और विनोद के पिताजी के दादाजी भाई भाई थे और उनके बीच सम्पति के बटवारें के लिए जो झगडे हुए वो आज तक चल रहे है भले ही सागर और विनोद के पिताजी के दादाजी का निधन हुए कई साल गुजर गए हो लेकिन -उनके परिवारों में आज भी मेलजोल नहीं है, सागर अपने परिचित की तबियत पूछने हॉस्पिटल जाता है तो वह वहां देखता है की विनोद और विनोद का पूरा परिवार बहुत चिंता में खड़ा है लेकिन वह कुछ समझ नहीं पता की आखिर हुआ क्या? वह इशारा कर विनोद को अपने पास बुलाता है और पूछता है की क्या हुआ? इस पर विनोद की आँखों से आंसू निकल पड़ते है और कहता है कि कल रात पिताजी का एक्सिडेंट हो गया और खून ज्यादा बह गया है डाक्टर ने तत्काल पिताजी को खून चडाने का बोला हैं, लेकिन ब्लड बैंक में खून नहीं है, यदि खून नहीं मिला तो कुछ भी हो सकता हैं, इस पर सागर विनोद से पूछता है की अंकल का ब्लड ग्रुप क्या है, विनोद बताता है की पापा का ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव है, इस पर सागर बोलता है कि ओ नेगेटिव तो मेरा भी है, चल मैं अंकल को ब्लड देता हूँ विनोद बड़े आश्चर्य से सागर की और देखता है और पूछता है तू देगा मेरे पापा को ब्लड? इस पर सागर बोलता है क्या हुआ मैं नहीं दे सकता क्या? विनोद बोलता है यदि घर पर मालूम पड़ा कि तुमने किसको ब्लड दिया है तो तेरे घर वाले तुझ पर बहुत नाराज होंगे, इस पर सागर बोलता है तू इस बात की चिंता मत कर मेरे घर वालो को मैं सम्हाल लूँगा, मैं तो अभी अंकल के लिए अपना ब्लड दूंगा और वह सीधे ब्लड बैंक में जाकर ब्लड दे आता है और अपने घर चले जाता है, ४ ५ दिन के बाद विनोद स्कूल आता है तो सागर उससे अंकल की तबियत के बारे में पूछता है, तो विनोद की आँखों से आंसू निकल पड़ते है और वह सबके सामने सागर से उसके किये की माफ़ी मांगता है और बोलता है की यदि तुम उस दिन पापा को खून नहीं देते तो कुछ भी हो सकता था, लेकिन तुमने मेरे पापा की जान बचा ली क्या तुम मुझे मेरी गलती के लिए माफ़ कर सकते हो? इस पर सागर विनोद को गले लगा लेता है और बोलता है अपने बीच किस प्रकार की माफ़ी, जो हुआ भूल जा आओ अब हम मिल जुल कर रहेंगे. कुछ दिनों के बाद होली का त्यौहार था मोहल्ले में होली दहन की तैयारी पूरी हो चुकी थी तभी सागर देखता है की विनोद अपने दादाजी के साथ होली दहन के लिए आया है, होली दहन के पहले सभी आपस में एक दुसरे को गुलाल लगा कर होली की बधाई दे रहे थे, सागर विनोद के दादाजी के पास जाकर उनके चरणों में होली का रंग डाल कर उनसे आशीर्वाद मांगता है, यह देख कर सभी मोहल्ले वाले आश्चर्य चकित हो जाते है कि विनोद के दादाजी सागर को आशीर्वाद देकर अपने गले लगा लेते है. इस बार की यादगार होली सागर और विनोद के परिवार ने एक साथ मिलकर खेली और उनके पुराने सभी मतभेद रंगों के पीछे छुप गए.