अतुल अपने समय पर उठ कर सोसाइटी के बगीचे में वर्कआउट कर अपने फ्लैट में आकर मम्मी से बोला की मैं नहाने जा रहा हूँ बहुत जोरो से भूख लगी है कुछ नास्ता बना दो, मम्मी ने बोला ठीक है जा जल्दी से नहाकर आजा, अतुल नहाने जा ही रहा था की उसके मित्र केतन का फ़ोन आ गया, पूछा कैसा घर पर क्या हाल है लॉक डाउन के अतुल ने बोला ठीक है तो केतन ने बोला यार मेने इसलिए फ़ोन लगाया की मेरे ऑफिस की बिल्डिंग के चौकीदार का फ़ोन आया था उसके पास राशन ख़त्म हो गया है तो मैंने सोचा कि तू वही रहता है क्या तू उसकी कुछ मदद कर सकता है क्या पैसे मैं तेरे को बाद में दे दूंगा, इसपर अतुल बोलता है बोल ना क्या करना है? मैं करा दूंगा, उसको मेरा फ़ोन न दे देना और बोलना फ़ोन कर ले और बोल दे की केतन ने बोला था बस, मैं उसकी जितनी हो सकेगी उतनी मदद कर दूंगा, इतना कहकर दोनों की बात ख़त्म हो गई, तभी अतुल को लगा की अपनी सोसाइटी में भी तो चौकीदार है उसके बारे में तो अपन ने सोचा ही नहीं, तुरंत नीचे आता है और चौकीदार के यहाँ जाकर पूछता है की बद्री कहा गया तो उसकी पत्नी बोलती है वो राशन की जुगाड़ में गए है, कल तक तो था लेकिन आज ख़त्म हो गया, तो कोशिश कर रहे है की कही से कुछ व्यवस्था हो जाय, इसपर अतुल ने बोला बद्री आय तो मेरे पास भेजना, तभी बद्री भी आ जाता है बोलता है भैया सब कुछ खत्म हो गया है पैसे भी नहीं है कैसे क्या होगा अभी तो बहुत समय बचा है, तो अतुल पूछता है क्या क्या चाहिए लिस्ट बना कर दे, बद्री अतुल को लिस्ट बनाकर देता है, अतुल लिस्ट को अपने किराने वाले संजय को फ़ोन पर भेज देता हैं और संजय को बोलता है की भैया यह सामान सोसाइटी के चौकीदार को दे देना इसके पैसे मेरे से ले लेना, संजय बोलता है ठीक है मैं जल्द से जल्द सामान भेज दूंगा, फिर अतुल सोसाइटी के सचिव से बात करता है की आज तो मैंने व्यवस्था कर दी इस पर सचिव महोदय ने बोला हां भाई अपन तो उसका भूल ही गए थे अच्छा किया तुमने संजय को बोल दिया, संजय से बोलना बिल मेरे को दे देना मैं उसका भुगतान सोसाइटी से कर देंगे और भी आगे उसकी मदद करेंगे, तभी अतुल की मम्मी की आवाज आती है कि कहा है नास्ता ठंडा हो रहा है, अतुल बोलता है आया मम्मी.....