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लॉकडाउन २० - दादी के घरेलु नुस्खे

राजू के घर पर उसके माता पिता के साथ उसकी दादी भी रहती है, परिवार में ३,३ बुजुर्ग होने से महामारी के समय वह बहुत सतर्कता के साथ घर में ही सबके साथ लॉक डाउन व्यतीत कर रहा है, राजू के पत्नी मंजू आधुनिक ख्यालो की है वह पुरानी बातोँ पर कम विश्वास करती है, राजू की ३ साल की बेटी है कल उसको खाने पीने में कुछ आ गया तो उसको दस्त उल्टी की शिकायत शुरू हो गई पहले तो मंजू ने इसको सामान्य लिया लेकिन २,३ दस्त के बात मंजू ने राजू से कहा की बिटिया को किसी डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा, राजू के दादी ने कुछ घरेलु उपचार बताये लेकिन मंजू ने एक नहीं सुनी और बोली आप तो अपनी रहने दो, अभी डॉक्टर का एक डोस लगेगा तो ठीक हो जाएगी, राजू और मंजू बिटिया को लेकर आस पास रहने वाले डॉक्टर के पास गए लेकिन किसी भी डॉक्टर ने वर्तमान में चल रही महामारी के कारण इलाज करने से इंकार कर दिया और बोले बड़े सरकारी अस्पताल में दिखाओ, मंजू सोच रही थी की बड़े अस्पताल में तो अभी महामारी के मरीज है इस हालत में बिटिया को वहां ले जाना उचित होगा, और बिटिया की हालत और ख़राब हो रही थी, बिटिया को लेकर राजू और मंजू घर लेकर आये, पिताजी ने पूछा क्या बोला डॉक्टर, इस पर मंजू रुआसी होकर बोली कोई डॉक्टर अभी इस महामारी में देखने को तैयार नहीं, तभी राजू के दादी बोली बेटी तू चिंता मत कर बेटी इसका इलाज तो अपने घर पर ही है, अभी चिंता की कोई खास बात नहीं बस तू मुझ पर विश्वास रख, मरता क्या ना करता मंजू ने दादी के बात मान ली और दादी ने अपने पुराने नुस्खे बताना शुरू किये, जिससे चमत्कार हो गया बिटिया की तबियत में कुछ ही समय में आराम आने लगा और वो सो गई, एक दो घंटे की नींद के उपरांत जब उठी तो उसकी तबियत पहले से बहुत अच्छी थी, मंजू को आज लगा की वो गलत है यदि दादी को बात पहले मान लेती तो बिटिया और जल्द अच्छी हो जाती, खैर बिटिया के अच्छे होने पर भी दादी ने उसको १,२ दिन परहेज रखने का बोला की बिटिया के प्यार में ऐसा ना हो की परहेज ना रखे, बाकि सब ठीक हो जायेगा, बिटिया घर में उछल कूद कर रही थी, राजू और मंजू दादी को सन्मान से देख मन ही मन अपनी गलती पर शर्मिंदा थे और सोच रहे थी की आज दादी के कारण हम एक बड़ी मुश्किल से बच गए.