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लॉकडाउन २३. ईमानदारी

रामलाल की उम्र करीब करीब ७५ वर्ष की होगी, वह अपनी पत्नी सरला के साथ अकेले रहता है, बेटा और बहु दिल्ली में रहते है, बेटा एक बड़ी कम्पनी में अच्छे पद पर कार्यरत है, वह पिताजी के लगभग सभी कार्य ऑनलाइन कर देता है जैसे दवाई, रिक्शा, घर के सभी बिलों का भुगतान इत्यादी वह ऑनलाइन ही कर देता है, जिससे रामलाल को जरुरी काम के लिए भागा दौड़ी नहीं करना पड़ती, सरला बहुत ही धार्मिक है, उसका अधिकांश समय पूजा पाठ में ही निकल जाता है. फिर २ लोगो का काम भी कितना रहता है, लॉक डाउन होने के पहले है बेटे ने ऑनलाइन दवाई मंगवा कर रख दी थी जिससे कोई परेशानी ना हो, घर में अनाज की भी कोई कमी थी नहीं, बस दूध सब्जी की थोड़ी दिक्कत थी क्योकि दूध वाले ने भी आना बंद कर दिया था, तो रामलाल ने दुसरे दूध वाले से बात कर ली अब दूसरा दूध वाला रोज़ सुबह दूध देकर चला जाता है, घर में सब्जी ख़त्म हो गई थी तो घर के सामने २ लडकियाँ सब्जी बेचने आई, तो सरला ने सोचा चलो कुछ सब्जी ले ही लेते है, रोज़ रोज़ आलू प्याज कब तक खायेंगे, तो उसने उन लडकियों से कुछ सब्जी ले ली, कुल 85 रु देना था तो सरला ने उनको 500 का नोट दिया, उन्होंने खुल्ले पैसे मांगे तो सरला ने बोला छुट्टे नहीं है, इस पर लडकियों ने बोला हमारी मम्मी पीछे सब्जी बेच रही है हम बाकि के पैसे उनसे लाकर आपको दे देते है, इस पर सरला ने बोला आओगी तो सही ना की पैसे लेकर भाग जाओगी, बोली अभी 5 मिनिट में लाकर देते है, सरला ने उनकी बात मान ली, और वह दोनों चली गई सरला उन दोनों का इन्तजार कर रही थी, लेकिन करीब करीब 1 घंटा हो गया वो दोनों नहीं आई, सरला को उन लडकियों के साथ साथ अपने पर भी गुस्सा आ रहा थी की क्यों उन लडकियों पर विश्वास किया, अब पैसे का नुकसान अलग हो गया, अभी किसी को भी बोलूंगी तो सब मेरे ऊपर ही नाराज होंगे की बोला था ना अभी किसी से भी कुछ मत खरीदना, लेकिन अब सरला कर भी क्या सकती थी, दुसरे दिन वो पूजा कर रही थी, तभी उन लडकियों की आवाज़ आई वो दरवाजे पर खड़ी होकर आवाज लगा रही थी, सरला दौड़ कर बाहर है देखा वो दोनों लडकिया दरवाजे पर खड़ी थी, सरला को देखते ही बोली यह आपके कल के बचे 415 रुपये, वो मम्मी के पास भी खुल्ले नहीं थे तो हम कल आपको देने नहीं आ पाए, सरला उन दोनों लडकियों को गौर से देख रही थी और सोच रही थी की अभी भी ईमानदारी जिन्दा है, सरला ने उन दोनों लडकियों से पूछा आज क्या है, इस पर लडकियों ने बोला आज तो सभी सब्जी बिक गई अब कुछ बाकि नहीं रहा, आपको क्या चाहिए बोल दो हम कल लाकर आपको सबसे पहले दे देंगे, इस पर सरला ने बोला नहीं अभी तो कुछ जरुरत नहीं. तुमने खाना खाया की नहीं, इस पर लडकिया बोली कहा खाया अभी तो जो पैसे कमाए है, उसमे से पहले पिताजी की दवाई लेंगे फिर जो बचेगा उसमे जो मिलेगा वो घर ले जाकर खायेंगे, इस पर सरला ने बोला आओ अन्दर आकर हाथ धो लो और खाना खा लो, लडकिया मना कर रही थी, बोली उधर मम्मी हमारा इन्तजार कर रही होगी, इस पर सरला ने कहा कोई बात नहीं ५ मिनिट ज्यादा इन्तजार कर लेगी, चलो तुम दोनों जल्दी अन्दर आकर हाथ धोकर खाना खा लो, में तुम्हारे लिए गरमा गर्म रोटी बनाती हु, गरमा गर्म रोटी का नाम सुनते ही दोनों के फटाफट हाथ धोकर खाना खाने बैठ गई, इस बार नवरात्री में लॉक डाउन के कारण सरला ने कन्या भोजन भी नहीं कराया था, आज दोनों को भोजन कराकर सरला को अपार ख़ुशी का अनुभव हो रहा है.