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लॉक डाउन २१. बॉस

मालती सोफ्टवेअर इंजिनियर है, काम के प्रति बहुत ईमानदार और मेहनती, उसकी काम के प्रति लगन देख उसका प्रमोशन कर इंदौर ऑफिस में ट्रान्सफर कर दिया, उसने इंदौर का नाम २ कारण से सुन रखा था एक तो स्वछता और दूसरा इंदौर ऑफिस का खडूस बॉस, खैर उसने सोचा बॉस से अपने को क्या करना और वह इंदौर आ गई, यहाँ उसने रहने के लिए एक होस्टल में कमरा ले लिया, लॉक डाउन होने से मालती को वर्क फ्रॉम होम करना था, तो वह होस्टल में ही रह कर रही थी, होस्टल की लगभग सभी लडकियाँ अपने अपने घर को जा चुकी थी, अब मालती होस्टल में लगभग अकेली थी, मेस वाले ने भी हाथ ऊँचे कर दिए की अब भोजन की व्यवस्था तुमको खुद को करना है, मालती परेशान हो गई खाने पीने की कोई व्यवस्था हो नहीं रही थी, इस कारण से समय पर वह ऑनलाइन नहीं हो पाती थी, आज बॉस का फोन भी आ ही गया, क्या बात है मालती तुम समय पर ऑनलाइन नहीं हो रही हो? ऊपर से शिकायत आ रही है, मालती ने बोला सॉरी सर गलती हो गई, वो क्या है ना होस्टल में कुछ हो नहीं पा रहा था ना इसलिए, मालती थोड़ी रुआसी होकर बोली, लेकिन आप चिंता ना करे अब में समय पर अपना काम पूरा करुँगी, कह कर मालती ने फ़ोन लग दिया. फ़ोन रखते ही मालती बोली इन्सान है की क्या? मालूम है लॉक डाउन है, फिर भी काम की लगी पड़ी है उसको, इधर खाने पीने की कुछ व्यवस्था हो नहीं रही क्या भूखे मर कर काम करू, एक बार ये ही पूछ लेता, कैसी हो, कुछ तकलीफ तो नहीं, बस काम, काम और काम, सोचकर मालती तैयार हो ही रही थी की फिर बॉस का फ़ोन बज गया, मालती ने फ़ोन नहीं उठाया और बोला लो २ मिनिट लेट क्या हो गई फिर फिर फ़ोन आ गया, सही कहते थे सभी की इंदौर का बॉस बहुत बुरा है, उसको तो सिर्फ काम से ही मतलब है, २ मिनिट बाद फिर बॉस के फ़ोन की घंटी बजती है, फ़ोन उठाते है ना हेलो ना कुछ मालती सीधे ही बोल देती है, सर मै वाशरूम में थी बस अभी लॉग इन कर रही हूँ सॉरी सर, उधर से आवाज आई मैं तुम्हारा बॉस नहीं बॉसनी बोल रही हूँ, फटाफट अपना बोरिया बिस्तर पैक करो १० मिनिट में तुम्हारे होस्टल आ रही हूँ, क्यों मेरे से कोई गलती हो गई क्या? मालती ने कहा, फालतू चु चपड़ मत कर, बोला ना १० मिनिट में बोरिये बिस्तर के साथ होस्टल के नीचे मेरे को मिल बस, मालती घबरा गई लेकिन करती भी क्या? अपना सामान पैक कर ही रही थी की फिर फ़ोन की घंटी बज उठी, फिर बॉस का फ़ोन था, मालती ने डरते हुए हेलो बोला तो उधर से मेम की आवाज आई अभी तक नीचे नहीं आई, सामान पैक कराने मैं उपर आऊ क्या? नहीं नहीं मेम मैं अभी आई, सामान उठा कर मालती नीचे आई तो देखती है बॉस और उनकी पत्नी कार में बैठे उसका इन्तजार कर रहे थे, बॉस ने झटपट मालती का सामान लिया और कार की डिक्की में डाल दिया और उनकी पत्नी ने कार का पीछे का गेट खोला और मालती का हाथ खीच कर गाड़ी में बैठा लिया, और बोली जल्दी बैठ कोई पुलिस वाला आ गया तो बहुत डंडे मारेगा, मालती को कुछ समझ नहीं आ रहा था की हो क्या रहा है? जैसे ही गाड़ी चली मेम ने कहा तुम्हारी इनसे बात हुई तो मैंने सुन ली, अरे तुम परेशान थी तो बोलना था ना, क्या हमारा घर तुम्हारा घर नहीं है? घर पर सास – ससुर, ये और बच्चें ही तो है, एक तुम और सही, जो भी होगा सब मिल जुल कर कर लेंगे, किन्तु मेम मालती कुछ बोलती, इसके पहले ही मेम ने कहा तुम मेरी छोटी बहन जैसी हो, बस तुमको बोल दिया ना अब तुम मेरे घर चलोगी तो चलोगी, मैं कुछ नहीं सुनूंगी तुम्हारी, इतने में बॉस का घर आ गया, घर पहुचने पर मालती कुछ सहमी सहमी थी इसपर बॉस की माताजी ने कहा बेटा इसको अपना घर ही समझो, जब काम हो तब काम करो फिर अपन सब मिलकर रहेंगे. यह सुनकर मालती ने माताजी पिताजी का आशीर्वाद लिया और मन ही मन सोच रही थी, कि मैं बॉस के बारे में क्या सोच रही थी और वह क्या निकले.